Monday, 3 June 2019

तेरी झलकियाँ

तेरी  झलकियाँ ऐ मेरे हमनवा ,
सितम मेरे नज़रो पे ऐसा किया ,
प्यार तुझसे हुआ... ऐ सनम तभी ,
दिल को दिल से मिलाना मुझे आ गया ||

देखते ही रह गया .. तुझको यु ऐ सनम ...
देखते ही रह गया .. तुझको यु ऐ सनम ..
चेहरे से पर्दा जो तेरे उठ गया ..
वक़्त ही रुक गया , लम्हा भी थम गया
तूने जादू ऐसा चलाया ,
की चाँद भी शरमा गया||

तेरी  झलकियाँ ऐ मेरे हमनवा ,
सितम मेरे नज़रो पे ऐसा किया
प्यार तुझसे हुआ... ऐ सनम तभी ,
दिल को दिल से मिलाना मुझे आ गया |

गुजरे जो तुम मेरे पास से.. ऐ सनम ..
हवाओ में नशा सा छा गया ..
धड़कनो को साँस छूने लगी ...
तेरी खुश्बू पे ही प्यार आ गया ||

हाथ की चूड़ियाँ यू खनकी तेरी ...
की आसमां में बिजली भी शरमा गयी ..
घटाएं भी बरसने लगीं ..
फूल भी खिलने लगे ..
मौसम भी लुभा सा गया ..
तेरी सोखियों  पे ऐ सनम तब हमे फिर प्यार आ गया ||

होठ है जो तेरे ...उन्हें मैं क्या कहुँ ..
जाम भी उतर उसपे शरमा गया ..
मस्तिया सी छा गयी फ़िजा में ..
होले जब तुमने मुस्कुरा दिया ..
बर्फ भी पिघलता गया , आग भी भुझती गयी ..
हाय ! तूने क्या कहर ये ढा दिया ||

चेहरे के ये नज़ारे तेरे...
नज़रो को भा गया ..
जब झुल्फ़ों को संवारा तूने ..
शाम भी शरमा गया ..
तूने झटके में ही चुराया दिल को ...
तेरा ये चुराना मुझे भा गया ..||

तूने ये क्या शरारत करि ...
शरारत को भी तुझपे प्यार आ गया .....
तेरी  झलकियाँ ऐ मेरे हमनवा ,
सितम मेरे नज़रो पे ऐसा किया ,
प्यार तुझसे हुआ... ऐ सनम तभी ,
दिल को दिल से मिलाना मुझे आ गया ||

Saturday, 3 September 2016

तुम

 जब भी करु तारीफ़ तुम्हारी ...शरमा सी जाती हो |
धीमे धीमे फिर मुस्काती हो |
हो पास अगर दर्पण कोई ..उसमे रूप अपना निहारा करती हो
मेरी नज़रो से फिर खुद को देखा करती हो |
झुका के नज़रे अपनी फिर पास मुझे महसूस किया करती हो ,पाओ न करीब मुझे तो ठंडी आहे भरती हो |
कानो की बालियाँ सहलाते
तस्वीर को मेरे फिर बारम बार देखा करती हो |
मुस्काते मुस्काते फिर रुक सी जाती हो ... बालो को अपनी सुलझाते मुझ में उलझ सी जाती हो |

प्यार तो करती हो ..बस मुझसे इजहार करते डरती हो ...दिल में मुझे छिपाये याद बोहोत करती हो |
गुमसुम कितनी भी रहो ..मेरा नाम सुनते ही खिल उठती हो |
जब भी मुझको देखा करती हो ..पनाहो में आने को मेरे मचल सी उठती हो|
दिल में अपने छिपाये मुझे ..आँखों में मेरी अपना प्यार ढूंढा करती हो |

नज़रे फेर लू अगर मैं ...घबरा सी जाती हो |
गुमसुम सी हो के ..एक टक बस मुझे देखा करती हो |
बे वजह ही कोई वजह फिर ढूंढा करती हो |
दबाये अपनी बातों को सीने में फ़ना मुझपे हुआ करती हो |
मेरी ही बातें दिल को अपने सुनाया करती हो ....
हाँ बस मुझे ही तुम चुपके चुपके चाहा करती हो ..